Wednesday, 16 August 2017

तेरे चेहरा जो आज देखा

आज मुद्दतों बाद देखा तुझे
दिल में एक नई उमंग खिल उठी।

तेरे हसीन चेहरे पर बिखरी हुई मुस्कान देख
मेरे कानों में एक आवाज़ गूंज उठी।

ये आवाज़ तेरी उस बेपरवाह हसी की है
जो मेरे हर मर्ज़ की दवा है,

ये आवाज़ है उन पलों की
जो हम ने इस ज़ालिम ज़माने से चुराए

इस आवाज़ में है तेरा रूठ जाना
फिर मनाने के लिए मेरा मीलों का सफ़र कर के तेरे पास आना

इस आवाज़ में सब कुछ है
तेरी हँसना, तेरा रोना, तेरी अठखेलियाँ, तेरी बदमाशियाँ
तेरा प्यार, तेरा गुस्सा, तेरा मिलना, तेरा बिछड़ना।

हाये! तेरी जुदाई, जब याद आई मुझे,
तेरी आँखों पर नज़र पड़ी मेरी।

ऐसा लगा जैसे आईना देख लिया मैंने,
क्योंकि तेरी आँखों में अपना ही दर्द नज़र आया मुझे।

ए खुदा, गलत साबित कर मुझे,
मेरी खुशियाँ ले कर मेरे यार की झोली में डाल दें,
दुआ देगा सारा जग तुझे।

उसे दर्द न देना एक पल भी तू
ये सारे तो तू दे दे मुझे।
उसके चेहरे की हसी देख कर ही गुज़र जाएगी अपनी ये जिंदगी।
और अगर तुझसे ये भी न हो,
तो मेरा यार लौटा दे मुझे।