उन दिनों, जब के तुम थे यहाँ
जिंदगी जागी जागी सी थी
सारे मौसम बड़े महरबां दोस्त थे
रास्ते दावतनामें थे जो मंज़िलों ने लिखे थे ज़मी पर हमारे लिए
पेड़ बाहें पसारे खड़े थे हमें छाँव की शाॅल पहनाने के वास्ते
शाम को सब सितारे बहुत मुस्कराते थे जब देखते थे हमें
आती जाती हवाँए कोई गीत खुशबू का गाती हुई छेड़ती थी, गुज़र जाती थी
आसमां पिघले नीलम का एक गहरा तालाब था जिसमें हर रात एक चाँद का फूल खिलता था और पिघले नीलम की लहरों में बहता हुआ वो हमारे दिलों के किनारों को छु लेता था
उन दिनों, जब के तुम थे यहाँ
~जावेद अख्तर~