तेरे आंचल से निकलता था सूरज ,
तेरे केशों में ढलती थी रात,
मैं भूल जाता था दुनिया को,
यह अभी कल की ही तो है बात!
तेरे होठों को छूते लब मेरे,
तेरी नर्म बाहों के थे घेरे,
कुछ दिन ही रहे हम साथ मगर,
कितने दूर थे तन्हाई के अंधेरे!
कुछ और दिन है इंतज़ार बाकी,
तेरी याद में मेरा तड़पना है बाकी,
हम इंतज़ार करेंगे मिलन का तेरे,
अभी तो हमे जिंदगी जीना है बाकी!
अनाम
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