Wednesday, 20 March 2019

एक ये होली है, एक वो होली थी

एक ये होली है, एक वो होली थी
तब भी हमारा शहर एक था
अब भी एक ही है
बस अब शहर मुंबई है, तब दिल्ली थी

एक ये होली है, एक वो होली थी
तब रंगों का रंग गुलाबी, लाल, हरा, पीला था
अब ये रंग सफ़ेद और काला है

एक ये होली है, एक वो होली थी
तब दोनों के गालों पर एक दूजे का रंग था
अब सिर्फ़ मेरे हाथों में ये रंग है

एक ये होली है, एक वो होली थी
तब तुम सिर्फ़ मेरे थे
अब तुम मेरे सिवा सबके हो

एक ये होली है, एक वो होली थी
तब सिर्फ़ खुशियों की किलकारियाँ थी
अब सिर्फ़ मौत का सन्नाटा है

Monday, 11 March 2019

शायद इसी को इश्क़ कहते हैं

आँखे है या समंदर, ये समझ न पाए हम
जब डूब गए इनमें तो जाना शायद इसी को इश्क़ कहते हैं

जुल्फें है या काली घटाएँ, ये समझ न पाए हम
जब इनकी बारिश हुई तो जाना शायद इसी को इश्क़ कहते हैं

मुस्कान है या खंजर, ये समझ न पाए हम
जब इससे कत्ल हुए तो जाना शायद इसी को इश्क़ कहते हैं

चेहरा है या पूनम का चाँद खिला, ये समझ न पाए हम
इसमे जब ख़ुदा दिख गया तो यकीन हो गया 'प्रेम', इसी को इश्क़ कहते हैं

~ Moonpie ~