आँखे है या समंदर, ये समझ न पाए हम
जब डूब गए इनमें तो जाना शायद इसी को इश्क़ कहते हैं
जुल्फें है या काली घटाएँ, ये समझ न पाए हम
जब इनकी बारिश हुई तो जाना शायद इसी को इश्क़ कहते हैं
मुस्कान है या खंजर, ये समझ न पाए हम
जब इससे कत्ल हुए तो जाना शायद इसी को इश्क़ कहते हैं
चेहरा है या पूनम का चाँद खिला, ये समझ न पाए हम
इसमे जब ख़ुदा दिख गया तो यकीन हो गया 'प्रेम', इसी को इश्क़ कहते हैं
~ Moonpie ~
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