Tuesday, 10 October 2017

चाँद की व्यथा

सोजा ए चाँद
कि तुझे कल फिर झूठ-मूठ में जगमगाना है
न कर सुबह का इंतजार
क्योंकि फिर सूरज की रोशनी में तुझे छुप जाना है

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